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Bihar Politics: NDA में रहते हुए चिराग पासवान के बदले तेवर, कानून-व्यवस्था से लेकर यूपी मिशन तक क्या है पूरी तस्वीर?

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | चिराग पासवान के बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल, NDA के भीतर प्रतिक्रियाएं और यूपी में पार्टी विस्तार की तैयारी पर पूरी रिपोर्ट।

पटना, 1 अक्टूबर, आलम की खबर: बिहार की राजनीति में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान के हालिया बयान चर्चा का विषय बने हुए हैं। एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद चिराग पासवान ने बिहार की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार के सामने गंभीर सवाल रखे हैं। उनके तेवर ऐसे समय में सामने आए हैं, जब बिहार में आपराधिक घटनाओं और महिला सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।

चिराग ने हाल की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आम लोगों के बीच सुरक्षा का भरोसा भी कायम होना चाहिए। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का हिस्सा होने के बावजूद ऐसी घटनाओं पर वह चुप नहीं रह सकते।

गठबंधन का हिस्सा, लेकिन मुद्दों पर खुलकर बोल रहे चिराग

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) बिहार में एनडीए की सहयोगी है। पार्टी के पास बिहार विधानसभा में 19 विधायक हैं, जबकि लोकसभा में उसके पांच सांसद हैं।

इसके बावजूद चिराग पासवान कई मौकों पर अपनी पार्टी से जुड़े मुद्दों और जनता की चिंताओं को सार्वजनिक रूप से उठाते रहे हैं। उनका राजनीतिक रुख यह संकेत देता है कि गठबंधन में रहने के साथ-साथ वह अपनी पार्टी की अलग पहचान और राजनीतिक आधार को भी बनाए रखना चाहते हैं।

बिहार में कानून-व्यवस्था से जुड़े हालिया मामलों पर उनकी नाराजगी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। हालांकि उनके वर्तमान बयानों के आधार पर गठबंधन से अलग होने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

जमुई और समस्तीपुर की घटनाओं के बाद बढ़ी सक्रियता

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर चिराग पासवान की सक्रियता हाल के दिनों में ज्यादा दिखाई दी है। जमुई में सामने आई घटना के बाद उन्होंने सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई। इसके बाद समस्तीपुर समेत बिहार के दूसरे हिस्सों में सामने आए मामलों पर भी उन्होंने प्रशासन की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर की।

चिराग का जोर इस बात पर रहा है कि कानून-व्यवस्था का असर केवल पुलिस की कार्रवाई से नहीं, बल्कि लोगों के मन में पैदा होने वाले सुरक्षा के भरोसे से भी मापा जाना चाहिए।

एनडीए के भीतर से भी आई प्रतिक्रिया

चिराग के लगातार बयानों के बाद एनडीए के दूसरे नेताओं की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। गठबंधन के नेताओं की ओर से यह बात कही गई कि सरकार के कामकाज से जुड़ी शिकायतों और सुझावों को आपसी बातचीत के जरिए रखा जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी चिराग के बयान पर प्रतिक्रिया दी और बिहार सरकार के पक्ष में अपनी बात रखी। इससे कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर एनडीए के भीतर अलग-अलग नेताओं की राय सार्वजनिक रूप से सामने आई है।

हालांकि इस राजनीतिक बयानबाजी को फिलहाल गठबंधन में किसी बड़े बदलाव का निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता। दोनों पक्ष अभी भी एनडीए के राजनीतिक ढांचे का हिस्सा हैं।

चुनाव आयोग के मुद्दे पर भी चिराग ने मांगी स्पष्टता

चिराग पासवान का रुख केवल बिहार सरकार से जुड़े मामलों तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग से जुड़े विवादों पर भी उन्होंने अपनी स्थिति रखी है।

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चिराग ने चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना रहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में अगर कोई भ्रम या सवाल पैदा होता है तो उसे दूर करना जरूरी है।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय स्तर के अलग-अलग मुद्दों पर चिराग अपनी पार्टी का रुख परिस्थितियों के अनुसार सामने रख रहे हैं।

यूपी में संगठन विस्तार की तैयारी

बिहार के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) उत्तर प्रदेश में भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी में है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने वहां संगठन विस्तार पर काम शुरू किया है।

पार्टी ने उत्तर प्रदेश को अलग-अलग संगठनात्मक क्षेत्रों में बांटकर जिम्मेदारियां तय की हैं। इसका उद्देश्य राज्य के अलग-अलग हिस्सों में संगठन को सक्रिय करना और पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाना है।

उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब जैसे राज्यों में भी चुनावी गतिविधियों को लेकर पार्टी की रुचि सामने आई है। हालांकि चुनाव के समय पार्टी कितनी सीटों पर मैदान में उतरेगी और उसका किसी दल के साथ तालमेल होगा या नहीं, इसकी अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।

नई राष्ट्रीय टीम से संगठन को विस्तार देने की कोशिश

पार्टी ने अगस्त 2026 में अपनी नई राष्ट्रीय टीम का भी गठन किया। इसमें अलग-अलग राज्यों के नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गईं।

चिराग पासवान की राजनीति में संगठन को बिहार से बाहर ले जाने की कोशिश पिछले कुछ समय से दिखाई दे रही है। ऐसे में नई राष्ट्रीय टीम और उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को पार्टी के व्यापक विस्तार की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

केंद्र में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे चिराग

चिराग पासवान केंद्र सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हैं। उन्होंने जून 2024 में मंत्रालय का कार्यभार संभाला था और वर्तमान में भी इसी मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके पास है।

इस तरह चिराग की राजनीतिक भूमिका दो स्तरों पर बनी हुई है। एक तरफ वह केंद्र सरकार में मंत्री हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार में एनडीए के सहयोगी दल के प्रमुख हैं। बिहार सरकार से जुड़े मुद्दों पर उनके बयानों को इसी राजनीतिक भूमिका के संदर्भ में देखा जा रहा है।

रामविलास पासवान की विरासत का भी हो रहा जिक्र

चिराग पासवान की मौजूदा राजनीति की चर्चा में उनके पिता और दिवंगत नेता रामविलास पासवान की गठबंधन राजनीति का उल्लेख भी होता है। रामविलास पासवान अलग-अलग राजनीतिक दौर में विभिन्न गठबंधनों के साथ रहे थे।

हालांकि चिराग के वर्तमान रुख को उसी राजनीतिक रणनीति की सीधी पुनरावृत्ति मानना एक राजनीतिक विश्लेषण होगा, स्थापित तथ्य नहीं। चिराग ने अपनी पार्टी की अलग राजनीतिक पहचान को लेकर पहले भी स्पष्ट रुख अपनाया है।

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) एनडीए के साथ रही और पार्टी ने जिन पांच सीटों पर चुनाव लड़ा, उन सभी पर जीत हासिल की।

आगे किस दिशा में जाएगी चिराग की राजनीति?

फिलहाल चिराग पासवान एनडीए का हिस्सा हैं और केंद्र में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। साथ ही बिहार में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर वह अपनी बात खुलकर रख रहे हैं।

दूसरी तरफ पार्टी बिहार से बाहर संगठन विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में चिराग की राजनीति के तीन पहलू आने वाले समय में खास तौर पर चर्चा में रह सकते हैं—बिहार सरकार के साथ उनके राजनीतिक संबंध, एनडीए के भीतर उनकी भूमिका और उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में पार्टी का विस्तार।

हालांकि मौजूदा बयानों के आधार पर गठबंधन से अलग होने या किसी नए राजनीतिक मोर्चे की ओर जाने की निश्चित तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।

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बिहार की राजनीति में एनडीए के भीतर सहयोगी दलों की भूमिका, कानून-व्यवस्था और आगामी चुनावों से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर Alam Ki Khabar की लगातार नजर बनी हुई है।

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